अहलुल बैत (अ.स.) के विरुद्ध आने से पहले अपनी ईर्ष्या पर नियंत्रण रखें
मौलाना (क़) के वास्तविकताओं से, जैसा कि शेख़ नूरजान मीरअहमदी ने सिखाया है।
पनाह माँगता हूँ मै अल्लाह की शैतान मर्दूद से,
शुरू अल्लाह का नाम लेकर, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है
Alhamdulillahi Rabbil ‘aalameen, was salaatu was salaamu ‘alaa Ashrafil Mursaleen, Sayyidina wa Mawlana Muhammadul Mustafa ﷺ. Madad ya Sayyidi ya Rasulul Kareem, Ya Habibul ‘Azeem, unzur halana wa ishfa’lana, ‘abidona bi madadikum wa nazarekum.
इमाम हुसैन (अ.स.) ने हमारे लिए उच्च मानक स्थापित कियें हैं
मुहर्रम में जब हम अहलुल बैत (अ.स.) के बारे में सोचते हैं, तो हम हमेशा कर्बला की घटना के बारे में सोचते हैं। आज इस दुनिया में, हर जगह कर्बला है। हर जगह अभूतपूर्व मात्रा में कत्लेआम हो रहा है, निर्दोषों का कत्लेआम हो रहा है, लोगों का कत्लेआम हो रहा है, और उनकी परवाह नहीं की जा रही है, इस बात की परवाह नहीं की जा रही है कि वे किसका प्रतिनिधित्व करते हैं या किस बात के लिए खड़े हैं। अब मानवता नहीं रही और यह आपदा हर जगह मानवजाति पर है।
जब हम इमाम हुसैन (अ.स.) की ज़िंदगी को याद करते हैं। सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ के चाहने वालों और उन लोगों के लिए जो विश्वास हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, अपने विश्वास को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, अपनी तस्लीम और समर्पण को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और मक़ाम अल-इहसान तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं; कि इसमें विश्वास, शक्ति और दृढ़ता का एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रतीक है। कि उन्होंने एक बहुत ही उच्च मानक, विश्वास का शिखर, संघर्ष का शिखर स्थापित किया। और हमारे जीवन में इसका एक जबरदस्त प्रतीक है। यह हमारे मारिफ़ाह वर्ष में एक रात और एक क्षण नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर अनुस्मारक है। सभी असहाब अन नबी ﷺ ही नहीं बल्कि अहलुल बैत के लिए उस वास्तविकता में उनका एक विशेष स्थान है।
उन्हें इस बात की विशेष समझ है कि इमाम हुसैन (अ.स.) ने अल्लाह (अज़्ज़ व जल) के आदेश का पालन किस हद तक किया। किस हद तक उनके परिवार और साथियों में से 73 लोगों ने खुद का बलिदान दिया। किस हद तक उन्होंने अपनी महिलाओं और बच्चों को उस कारवां में साथ ले गाए और यह जानते हुए भी कि वे सभी मुश्किल में पड़ने वाले हैं। लेकिन यह विचार हमेशा मानवता के लिए आशा की भावना थी। कि अगर वे हमें हमारे परिवार के साथ देखते हैं और वे देखते हैं कि हम हथियारबंद नहीं हैं या किसी पर हमला करने नहीं आ रहे हैं, बल्कि हम सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ के प्यार को फ़ैलाना आ रहे हैं।
इमाम हुसैन (अ.स.) पैगंबर ﷺ की सुन्नत को कायम रखने आए थे
इसका मतलब है कि हर पहलू में यह हमारे लिए एक प्रतीक है कि इमाम हुसैन (अ.स.) सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ की सुन्नत को कायम रखने के लिए आए थे। वे नवप्रवर्तन कर रहे थे, परिवर्तन कर रहे थे और चीजें कर रहे थे। और उन्होंने कहा, लोगों ने कहा, “पैगंबर ﷺ का वह प्रकाश लाओ, सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ की सुन्नत लाओ, सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ का मार्ग लाओ, जो आपकी विरासत है, उसे हमारे यहाँ लाओ और हमारे लोगों के पास लाओ”। वे बस कत्लेआम करना चाहते थे; उनका, उनके बच्चों का, जवान लड़कों का, महिलाओं का क़त्लेआम। वे हर किसी को कत्ल करना चाहते थे और उन्हें इसकी परवाह नहीं थी। हम इसे अब धरती पर देखते हैं, कि अब इस धरती पर दज्जाल सेनाएँ हैं जो पूरी दुनिया में हैं और इस्लाम होने का दावा कर रही हैं, और वे जो कुछ भी होने का दावा कर रहे हैं। यह एंटी-क्राइस्ट की लड़ाई है। ये दज्जाल और दज्जाल सेनाओं की लड़ाई हैं जो अब धरती पर हैं।
अहलुल बैत आस्था और हमारे नायकों के प्रतीक हैं
हमारे लिए एक अनुस्मारक यह है कि वे (अहलुल बैत) विश्वास के प्रतीक हैं। हर समय और हम सभी के जीवन में अपने-अपने उदाहरण हैं, हर बार जब हम संघर्ष कर रहे होते हैं, तो आपको उनके पवित्र जीवन को वापस लाना होगा। हर बार जब हम किसी चीज़ से संघर्ष कर रहे होते हैं, हम किसी चीज़ से खुश नहीं होते हैं, कुछ हमारे हिसाब से नहीं हो रहा होता है, चाहे वह कुछ भी हो और जीवन में हमारी परीक्षाएँ हों, महत्व यह है कि वे हमारे नायक हैं। तो जो लोग पहचानना पसंद नहीं करते हैं, क्योंकि शैतान नायक के प्रतीक को छिन लेना चाहता है और उसकी जगह जहन्नम के गड्ढों से एक रैप स्टार रखना चाहता है। लेकिन वे जो चाहते हैं, और जो पैगंबर ﷺ हमारे लिए चाहते हैं, “अतीउ अल्लाह व अतीउर रसूल व उलिल अम्रे मिनकुम” वह यह है: “इन स्वर्गीय लोगों को नायकों के रूप में उपयोग करें।”
﴾ياأَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا أَطِيعُواللَّه وَأَطِيعُوٱلرَّسُولَ وَأُوْلِي الْأَمْرِ مِنْكُمْ…﴿٥٩
4:59 – “Ya ayyu hal latheena amanoo Atiullaha wa atiur Rasula wa Ulil amre minkum…” (Surat An-Nisa)
“ए ईमान लानेवालो, अल्लाह की आज्ञा का पालन करो, रसूल का कहना मानो, और उनका भी कहना मानो जो तुममें अधिकारी लोग हैं…” (सूरत अन-निसा, 4:59)
जब जीवन में परीक्षा हो, तो इमाम हुसैन (अ.स.) की कठिन परीक्षा को याद रखें।
कि उनके जीवन को याद करो, उनके संघर्ष के प्रतीक को याद करो। कि यह हमेशा एक क़िबला है, एक ‘सम मार्ग’, एक समान मार्ग को लगातार बनाए रखने का एक तरीका। कि जैसे ही कोई चीज़ मुश्किल हो जाती है, जैसे ही हमें कोई शिकायत होती है, जैसे ही चीज़ें हमारे हिसाब से नहीं होती हैं, आप उन्हें याद करते हैं। और आप याद करते हैं कि आप कितने महत्वहीन हो और उनकी तुलना में आपकी परीक्षा हास्यास्पद रूप से कितनी मूर्खतापूर्ण है।
वे कहते हैं, “क्या आप वास्तव में ऐसा कह रहे हो? आप हमारे पास यह हास्यास्पद शिकायत लेकर आ रहे हो? अपने ऐशो-आराम, बड़े घरों, बड़ी गाड़ियाँ, एयर-कंडीशनिंग, भरपूर भोजन की गोद में। जहाँ लोग (उस समय) पैदल चल रहे थे और कुछ पीने के लिए ढूँढ रहे थे और उनके पास पीने के लिए कुछ नहीं था, खाने के लिए कुछ नहीं था। 140F डिग्री तापमान में, हिजरा कर रहे थे, हज कर रहे थे। वे जो सब कुछ कर रहे थे, वह बस एक आम दिन का संघर्ष था अपने परिवार के लिए भोजन और पानी ढूँढना, सूरज की गर्मी से आश्रय ढूँढना। अपनी सारी विलासिता और अपनी सारी खुशियों के साथ। मौलाना हमेशा एयर-कंडीशनिंग की भी याद दिलाते हैं, क्या आप एयर-कंडीशनिंग के साथ हज करने की कल्पना कर सकते हैं? यह हास्यास्पद है। आपको शर्म आती है। वे गर्मी में चल रहे थे और संघर्ष कर रहे थे। जब वे उपवास कर रहे थे, तो वे 140F तापमान में उपवास कर रहे थे। और वे उपवास करते हुए युद्ध कर रहे थे क्योंकि, आप ईश्वर के दूत को नहीं रोक सकते। जब लोग कहते हैं, “वे दूत को रोकने जा रहे हैं” तो यह डाक सेवाओं को रोकने जैसा है जो एक संघीय अपराध है। इसका मतलब है कि आप अल्लाह (अज़्ज़ व जल) द्वारा भेजी जाने वाली चीज़ों को रोक नहीं सकते और वे रोज़े से थे। उनके संघर्ष कितने कठिन थे और हमारा जीवन कितना हास्यास्पद है। लेकिन हमें बहुत सारी समस्याएँ मिल जाती हैं। हमें बहस करने, लड़ने और गुस्सा करने के लिए चीज़ें मिल जाती हैं।
शैतान हर उस चीज़ को नष्ट करना चाहता है जो अच्छी और शुद्ध है
उन्हें उदाहरण के तौर पर रखने का कारण यह है कि उनका स्थान बहुत ऊँचा है, और उनका त्याग बहुत महान। वे आपको याद दिलाते हैं: “अपने छोटे-मोटे मुद्दे छोड़ दो। ये आपको अल्लाह (अज़्ज़ व जल) की संतुष्टि से रोक रहे हैं। ये वे समस्याएं नहीं हैं जिनके बारे में आप सोचते हैं कि आप सामना कर रहे हैं। हम जिस दौर से गुज़रे उसकी तुलना में ये कुछ भी नहीं हैं और हम सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ का परिवार हैं।” आप किसी ऐसे व्यक्ति से उम्मीद करेंगे जो सृष्टि का सबसे प्रिय हो, कि उनके परिवार के साथ इस धरती पर राजघराने जैसा व्यवहार किया जाएगा। वे एक उदाहरण के तौर पर आते हैं कि नहीं, स्वर्ग में हमारे साथ राजघराने जैसा व्यवहार किया जाता है। लेकिन यह धरती अपने स्वभाव से ही श्यातींन (शैतानों) से भरी हुई है और वे बस यही चाहते हैं कि जो कुछ भी अच्छा है, जो कुछ भी शुद्ध है, जो कुछ भी हक़ (सत्य) से बना है, उसे नष्ट कर दें।
वे हमें याद दिलाते हैं। इसका मतलब है कि हर दिन हमें याद रखना चाहिए कि हम किस चीज़ के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यदि हम बुरे विशेषताओं से संघर्ष नहीं कर सकते, तो यही वह विशेषता है जो इमाम हुसैन (अ.स.) के लिए समस्याओं का कारण बनी। क्योंकि हमारे पास यह हर दिन है। इसलिए वे कहते हैं कि हर दिन आशूरा है और हर जगह कर्बला है।
वे अहलुल बैत में सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ की रोशनी क्यों नहीं देख पाए?
कि कैसा है स्वर्ग का अद्भुत पक्षी, सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ के नवासे। उन्हें लगातार चूमा जाता था, लगातार उनके ﷺ प्यार से पोषित किया जाता था। वह ﷺ इमाम हुसैन (अ.स.) की गर्दन पर चूमते थे, और वह इमाम हसन (अ.स.) के होठों पर चूमते थे, जिसका अर्थ था: “मुझे पता है कि आप (हुसैन (अ.स.)) तलवार से मारे जाओगे और आप (हसन (अ.स.)) को ज़हर दिया जाने वाला है।”
ये जन्नत के पंछी हैं और ये हमारी जिंदगी में आते हैं कि, ये हमारी रोशनी क्यों नहीं देख पाए? वे सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ के साथ हमारे रिश्ते को क्यों नहीं देख पाए? वे इस दुनिया (विश्व) में हमारे अस्तित्व के महत्व को क्यों नहीं देख पाए? वे लोग अज़ान (प्रार्थना के लिए बुलाना) देकर प्रार्थना कर रहे थे। अविश्वासियों के बारे में भूल जाओ, इसका अविश्वासियों से कोई लेना-देना नहीं है। अविश्वासी लोग विश्वास नहीं करते हैं और वे विश्वास करते हैं जिस पर वे विश्वास करना चाहते हैं, वह ठीक है। लेकिन तथाकथित ‘विश्वास’ के लोगों के माध्यम से, वे इमाम हुसैन (अ.स.) की रोशनी क्यों नहीं देख पाए?
तब इमाम हुसैन (अ.स.) हमारी ज़िंदगी में आते हैं और कहते हैं, “हाँ, बुरे चरित्र के कारण।” वह बुरा चरित्र सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ के परिवार का क़त्लेआम करने की हद तक चला गया। इसलिए जब लोग यह नहीं सोचते कि उनका बुरा चरित्र कोई समस्या है, और कहते हैं: “मुझे अपने बुरे चरित्र के खिलाफ़ क्यों लड़ना है? मुझे अपने गुस्से और ईर्ष्या के खिलाफ़ क्यों लड़ना है?” वे कहते हैं “यही सब मेरे कर्बला का कारण बने। वे सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ की रोशनी क्यों नहीं देख पाए जो वे लेकर चल रहे हैं? क्योंकि उनमें ईर्ष्या थी।
हर बुराई की जड़ क्रोध की आग है
वे चाहते हैं कि हम समझें कि हर चीज़ की जड़ आग है। इसलिए जिस किसी के पास आग है, जब वह आग दिल में बैठती है, तो वह आपके फ़रनेस की ‘पायलट लाइट‘ की तरह होती है। अगर हम उस पायलट लाइट को बाहर निकालकर नष्ट नहीं करते, तो हर बुरी विशेषता उस पायलट लाइट पर गैस की तरह होती है। इसीलिए सलातुन नजात और सलातुन नजात की नमाज़ का महत्व है। तहाज्जुद और फ़जर (सुबह) के समय की सभी प्रार्थनाओं के बाद, सलातुन नजात “मुक्ति की प्रार्थना” है। हम प्रार्थना करते हैं कि या रब्बी इस क्रोध, उस आग, ‘जड़‘ को दूर कर दें। बुरी आग, अल्लाह (अज़्ज़ व जल) जो चाहता है उसे पकड़ने की आग नहीं। यह क्रोध की बुरी आग है जो बिना किसी कारण के बाहर निकलती है।
सलातुल नेजात की दुआ – मुक्ति की प्रार्थना
يَا رَبِّي كَمَا تأكُلُ النَّارُ الْحَطَبَ هَكَذَا الْحَسَدُ المُتَأصِّلُ فيِّ يَأكُلُ جَمِيْعِ أَعْمَالِيْ. يَا رَبِّي خَلِّصْنِيْ مِنْهُ
وَمِنَ الْغَضَبِ النَفْسَانِي، وَمِنْ نَفْسٍ الْطِفْلٍ المَذْمُومَةِ، وَمِنَ الْأَخْلَاقِ الْذَمِيْمَة. وَيَا رَبِّي بَدِّلْ كُلُّ أخْلَاقِي
إِلَى أَخْلَاقٍ حَمِيْدَةِ وَأفْعَالٍ حَسَنَةْ.
Ya Rabbi, kama takulun narul hataba hakadhal hasadu mutassilu fi ya kulu jam’i a’mali. Ya rabbi khalasni minh, wa minal ghadabin nafasani, wa min nafsit tiflil madhmuma, wa minal akhlaqidh dhamima. Wa ya rabbi, baddil kulu akhlaqi ila akhlaqin hamida wa af’aalin hasana.
हे मेरे प्रभु! जिस प्रकार अग्नि लकड़ी को भस्म कर देती है, उसी प्रकार मुझमें निहित ईर्ष्या मेरे सभी कार्यों को भस्म कर देती है। हे मेरे प्रभु, मुझे इससे शुद्ध करो और मेरे अहंकार के क्रोध से भी मुझे शुद्ध करो। हे मेरे प्रभु, मुझे बच्चे के दोषपूर्ण अहंकार और निन्दनीय आचरण से भी मुक्त करो। और हे मेरे प्रभु, मेरे सभी आचरणों को प्रशंसनीय आचरण और अच्छे कर्मों में बदल दो।
मुहम्मद ﷺ, अहलुल बैत और औलिया के खिलाफ आने से पहले अपने भीतर के यज़ीद को नियंत्रित करें
ईर्ष्या के आते ही क्रोध की वह पायलट लाइट, एक तेल की तरह है। वे उनके पद से ईर्ष्या करने लगे, सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ के साथ उनके रिश्ते से ईर्ष्या करने लगे, वे जिसका प्रतिनिधित्व करते हैं उससे ईर्ष्या करने लगे। तुरन्त वह तेल उस अग्नि पर लगा और धमाका वे प्रज्वलित हो गए। उस ईर्ष्या ने उन्हें यह देखने से रोक दिया कि वे क्या करने वाले थे। इसने उन्हें यह समझने से रोक दिया कि वे क्या करने वाले थे। शैतानों की संगति में वे गए और मिटा दिया, सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ के परिवार को नष्ट कर दिया। जिनमें से कई युवावस्था में सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ की हुबहू छवि थे। जिस चीज़ को वे पुकार रहे थे और अज़ान दे रहे थे और अल्लाह (अज़्ज़ व जल) की स्तुति और महिमा कर रहे थे, उन्हीं के सामने वे उन्हें क़त्ल कर रहे थे। शितन किस हद तक खेल सकता है और लोगों को नष्ट कर सकता है।
तो अब कल्पना कीजिए कि उन्हें देखे बिना, उनके साथ हुए बिना, उस पवित्रता के बिना हमारे पास क्या मौका है? जब दुनिया आग से भरी है और दुनिया बुरी विशेषताओं से भरी है। हर कोई चाहता है कि उनकी आग बढ़ती रहे। फिर वे सभी को दुर्व्यवहार करना, मारना और क़त्लेआम करना शुरू कर देते हैं। यही कारण है कि यह दुनिया का अंत है। यही कारण है कि ये महत्वपूर्ण जीवन और ये महत्वपूर्ण घटनाएँ धार्मिक सीमाओं से परे हैं। यह सिर्फ एक धर्म के लिए ठीक नहीं है; सभी धर्मों ने इस कहानी को याद रखा। यह पूरी मानवता के लिए एक कहानी है। यह एक कालातीत कहानी है कि यदि आप अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रखते हैं, तो आपका यज़ीद और आपका शैतान सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ के खिलाफ आएगा। और सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ के अहलुल बैत के खिलाफ आएगा और इस दुनिया के उलिल अम्र के खिलाफ आएगा। जैसा कि आप पूरी दुनिया में देख रहे हैं कि वे अभी यही कर रहे हैं। वे सभी धर्मपरायण लोगों से लड़ते हैं। वे पृथ्वी पर सभी वास्तविक अहलुल बैत, सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ के प्रतिनिधियों से लड़ते हैं। शैतान पूरी ताकत से हमला कर रहा है। वे अब भी सभी मकामों पर जा रहे हैं और मकामों को जला रहे हैं और मकामों को नष्ट कर रहे हैं। जिस जीवन और दिन में हम जी रहे हैं वह बहुत खतरनाक दिन है।
बुरे चरित्रों को ख़त्म कर दें इससे पहले कि वे आपके प्रियजन पर हमला करें
यही कारण है कि आप इन घटनाओं के लिए रोते हैं लेकिन मुझे लगता है कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इमाम हुसैन हमारे लिए रो रहे हैं, और हम किस दौर से गुजरने वाले हैं। कि अगर हम अपने गुस्से को कम करने के लिए तैयार नहीं हैं, अगर आप बुरे गुणों को हटाने के लिए तैयार नहीं हैं। यदि आप ईर्ष्या, हसद, आलस्य, किसी भी प्रकार की बुरी विशेषता के खिलाफ आने के लिए तैयार नहीं हैं, तो यह आपको उस चीज के विरुद्ध खड़ा कर देगा जिसे आप सबसे अधिक प्यार करते हैं। क्योंकि आप पैगंबर ﷺ के विरुद्ध आने वाले हैं, आप पैगंबर ﷺ के आदेश के विरुद्ध आने वाले हैं। आप हर उस चीज़ के ख़िलाफ़ आने वाले हैं जिसे आप सोचते हैं कि आप प्यार करते हैं। और पलक झपकते ही आप कुछ ऐसा कर बैठते हैं जिसका आपको ताउम्र पछतावा होता है। वे पैगंबर ﷺ के सामने कैसे जाएँगे और बताएँगे कि उन्होंने क्या किया? क्या कोई ‘माफ़ी’ है जिसे आप सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ की मौजूदगी में कह सकते हैं?
इसीलिए तज़किया का तरीक़ा और शुद्धिकरण का तरीक़ा हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है। सदैव हिसाब लेना। आज आप अपने बॉस से लड़ रहे हैं, अपने साथ काम करने वाले लोगों से लड़ रहे हैं। कल यह हर किसी को होने वाला है, और हर कोई उस ज़ुल्म की आग के नीचे आने वाला है।
हम प्रार्थना करते हैं कि अल्लाह (अज़्ज़ व जल) हमें इस आशूरा में, क्षमा के सागर, प्रकाश के सागर प्रदान करें। अगर अल्लाह (अज़्ज़ व जल) हमसे खुश है और हमसे प्यार करता है, तो सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ, पैगंबर ﷺ को वह प्यार दे कि वह हमसे खुश रहें और हमसे प्यार करें। कि उनकी रोशनी हमें सजाएँ, उनका क़ुर्ब और उनकी निकटता, हमें उनकी निकटता में लाए और हमें इन आग से बचाए। क़ुल या नारू कूनी बरदन व सलामुन ‘अला इब्राहीम व अहलिल नबी करीम, हबीबुल ‘अज़ीम, सैय्यदीना मुहम्मदुल मुस्तफा ﷺ।
﴾قُلْنَا يَا نَارُ كُونِي بَرْدًا وَسَلَامًا عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ ﴿٦٩
21:69 – “Qulna ya naaru, kunee Bardan wa Salaman ‘ala Ibrahim.” (Surat Al-Anbiya)
“हमने कहा, ऐ आग, ठंडी हो जा और सलामती बन जा इबराहीम पर।” (सूरत अल-अंबिया, 21:69)
इंशाअल्लाह अल्लाह हमें आशूरा की रोशनी से यह अता कर दे कि हम कुछ नहीं हैं, हम दाईफ़ हैं, हम कमज़ोर सेवक हैं। लेकिन हम केवल प्रेम के द्वार से आ रहे हैं, सैय्यदीना मुहम्मद ﷺ का प्रेम, अहलुल बैत बैतुन्नबी (अ.स.) का प्रेम, असहाबुन नबी (अ.स.) का प्रेम, औलियाउल्लाह फ़िस समायी व फिल अर्द का प्रेम।
Subhana rabbika rabbal ‘izzati ‘amma yasifoon, wa salaamun ‘alal mursaleen, walhamdulillahi rabbil ‘aalameen. Bi hurmati Muhammad al-Mustafa wa bi siri Surat al Fatiha.
इस सोहबाह का प्रतिलेखन करने में उनकी मदद के लिए हमारे प्रतिलेखकों के लिए विशेष धन्यवाद।
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