तासीन से यासीन तक शक्ति के ह्रदय की यात्रा
मौलाना (क़) के वास्तविकताओं से, जैसा कि शेख़ नूरजान मीरअहमदी ने सिखाया है।
पनाह माँगता हूँ मै अल्लाह की शैतान मर्दूद से,
शुरू अल्लाह का नाम लेकर, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।
Alhamdulillahi Rabbil ‘aalameen, was salaatu was salaamu ‘alaa Ashraful Mursaleen, Sayyidina wa Mawlana Muhammadul Mustafa ﷺ. Madad ya Sayyidi ya Rasulul Kareem, Ya Habibul ‘Azeem, unzur halana wa ishfa’lana, ‘abidona bi madadikum wa nazarekum.
“ता” – सबसे शुद्ध सत्य, “सीन” – अपार रहस्य
हमने छोड़ दिया, “Taa-Seeen; tilka Aayaatul Qur-aani wa Kitaabim Mubeen.”
﴾طس ۚ تِلْكَ آيَاتُ الْقُرْآنِ وَكِتَابٍ مُّبِينٍ ﴿١
27:1 – “Taa-Seeen; tilka Aayaatul Qur-aani wa Kitaabim Mubeen.” (Surah al-Naml)
“ये आयतें हैं क़ुरान और एक स्पष्ट किताब की।” (सूराह अल-नम्ल, 27:1)
“ता-सीन” के उस महीने में ता और शुद्ध रहस्य था। अल्लाह (अ.ज) का सबसे शुद्ध रहस्य यह है कि वह हमारी आत्माओं को उस वास्तविकता की यात्रा पर ले जा रहा है। समय नहीं बचा है, कोई समय नहीं बचा है। यह दिल की ओर और सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ की वास्तविकता और हक़्क़ाएक़ (वास्तविकताओं) की ओर एक यात्रा है। ताहिर उल हादी (शुद्ध मार्गदर्शक) “ता-हा” से – शुद्ध रहस्य, सबसे अधिक शुद्ध, इससे अधिक शुद्ध कुछ भी नहीं हो सकता। परिणामस्वरूप, अल्लाह (अ.ज), ‘यह इतना पवित्र है कि यह हक़ (सत्य) है और इसके हक़ के परिणामस्वरूप मेरे पवित्र शब्द इसकी वास्तविकता के माध्यम से आगे बढ़ सकते हैं।’ सीन – यह बहुत बड़ा रहस्य है। हर प्रकाश का रहस्य और हर रहस्य का प्रकाश। हर वास्तविकता उस वास्तविकता से निकलेगी।
अल्लाह (अ.ज) की ईश्वरीय वाणी सृजित नहीं है
फिर हमने सूरह यासीन ﷺ के महीने में प्रवेश किया, जहां फिर से अल्लाह (अ.ज) अब उस वास्तविकता का रहस्य बता रहा है कि, ‘आपने उस गुफा और 27 के राज्य में प्रवेश किया। 36 की वास्तविकता में आपने सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ के दिल में प्रवेश किया।,’ जहां यह आग ईश्वरीय उपस्थिति से बह रही है, जिसमें अल्लाह (अ.ज) हमारे अदब (शिष्टाचार) के लिए, “ता-सीन, आयातिल क़ुर-आन।” “आयातिल क़ुर-आन,” आप यह भी नहीं कह सकते, ‘यह क़ुरआन है,’ क्योंकि अल्लाह (अ.ज) का कोई शरीक (साझेदार) नहीं है, यह बनाया नहीं गया है। अल्लाह (अ.ज) का क़ुरान – अल्लाह (अ.ज) की दिव्य वाणी सृजित नहीं है। तो अल्लाह (अ.ज) हमें अदब देता है, ‘यह आयातिल क़ुर-आन है।‘ “आयतुन मिन आयति अल्लाह।”
﴾ذَٰلِكَ مِنْ آيَاتِ اللَّـهِ ۗ ﴿١٧
18:17 – “..Dhalika min ayati Allahi…” (Surat Al-Kahf)
“…यह अल्लाह की निशानियों में से है …” (सूरत अल-कहफ़,18:17)
ये अल्लाह (अ.ज) की निशानियाँ हैं। यह एक निशानी है, आप यह नहीं कह सकते कि, ‘यह क़ुरान है,’ यह एक निशानी है! इस मेराज (आरोहण) पर पैगम्बर ﷺ के हृदय में आप अपनी आत्मा के साथ जिस अग्नि का साक्षी बन रहे हैं, वह दिव्य वास्तविकताओं की अग्नि है। यह हू की उपस्थिति की आग है। यह उपस्थिति की आग है जिसका प्रतिबिंब सैय्यदिना मूसा (अ.स.) ने धरती पर देखा जब अल्लाह (अ.ज) ने वर्णन किया, ‘आओ, आगे आओ, अपने जूते उतारो, यह एक पवित्र परिसर है। जो लोग इसके आसपास हैं और जो इसमें हैं वे धन्य हैं।’
﴾فَلَمَّا جَاءَهَا نُودِيَ أَن بُورِكَ مَن فِي النَّارِ وَمَنْ حَوْلَهَا وَسُبْحَانَ اللَّـهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ ﴿٨
27:8 – “Falammaa jaaa’ahaa noodiya am boorika man finnnnaari wa man hawlahaa wa Subhaanal laahi Rabbil ‘aalameen.” (Surah an-Naml)
“फिर जब वह उस के पास पहुँचे तो उन्हें आवाज़ आई कि: “मुबारक है वह जो इस आग में है और जो इसके आस-पास है। महान और उच्च है अल्लाह, सारे संसार का रब।” (सूराह अन-नमल, 27:8)
सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ का राष्ट्र अपने ह्रदय में वास्तविकता की ज्वाला रखता है
वो बनी इसराइल (इसराइल के बच्चों) के लिए था। उम्मत ए मुहम्मद ﷺ (पैगंबर ﷺ का राष्ट्र) के लिए वे – कोई प्रतिबिंब नहीं – वे हक़ाएक़ में हैं और सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ की आत्मा की वास्तविकता में हैं और वे उस वास्तविकता से इस दुनिया में प्रकट होते हैं। वे इस धरती पर चलती-फिरती जलती हुई झाड़ियाँ हैं – उनके हृदय में उस वास्तविकता की ज्वाला है, मेराज की नहीं। नबी मूसा (अ.स) ने उस वास्तविकता के मेराज को देखा। लेकिन वो उस हक़ीक़त को इस धरती पर लेकर चलते हैं और ये सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ की रहमाह और दया है।
सभी ज्ञान हुरूफ (अरबी अक्षरों) में कूटबद्ध हैं
तो अब अल्लाह (अ.ज) 36 वें “या-सीन” से क्या वर्णन करता है।
﴾يس ﴿١
36:1 – “Ya-Seen.” (Surat YaSeen)
“या-सीन।” (सूरत यासीन, 36:1)
अल्लाह (अ.ज) अब या की क़सम खाकर कहता है कि सारे उलूम, सारे ज्ञान कलामों (शब्द) में हैं, वर्णमाला में हैं, हुरूफ़ में हैं। अलिफ़ से लेकर या अक्षर तक, अट्ठाईस अक्षर संपूर्ण वर्णमाला – अरबी वर्णमाला को समाहित करते हैं। अल्लाह (अ.ज) एक उपहार दे रहा है कि, ‘मैं आपको कैसे वर्णन कर सकता हूं कि मैं आपको हर ज्ञान देना चाहता हूं?’ तो इसका मतलब है कि हर अक्षर – क्योंकि हर नूरुल अनवर सिर्रतल असरार, प्रकाश का हर रहस्य और हर रहस्य का हर प्रकाश – यह कहने का एक और तरीका है कि हर ज्ञान अक्षरों के साथ है। इसलिए, ‘यदि मैं तुम्हें इन अक्षरों का रहस्य दे दूं तो तुम्हें सभी ज्ञानों का रहस्य प्राप्त हो जाएगा।’ जो कुछ भी एक शब्द में समाहित होगा और स्वयं को अनुरूपित करेगा, आपको पहले से ही इन हर एक हूरूफ का रहस्य दिया गया है और उनकी असीम क्षमता आपके हृदय और आपकी आत्मा पर सजी होगी।
“या” “सीन” पर प्रकट होता है – इल्म उल यक़ीन, ऐन उल यक़ीन, और हक़ उल यक़ीन
जब अल्लाह (अ.ज) “या” की कसम खा रहा है कि, ‘मेरे सभी उलूम (ज्ञान), मेरे सभी रहस्य, हर वास्तविकता।’ “या” का यह ज्ञान, यह “सीन” पर कैसे प्रकट होता है। कि ‘इल्म उल यक़ीन (निश्चितता का ज्ञान) का हर ज्ञान, ऐन उल यक़ीन (निश्चितता की दृष्टि) का हर ज्ञान, हक़ उल यक़ीन (सत्य की निश्चितता) का हर ज्ञान इस “सीन” का रहस्य है।
कि निश्चितता का ज्ञान, दृष्टि, और हर निश्चितता की आध्यात्मिक वास्तविकता और यह आपके लिए निश्चितता के हक़ के रूप में कैसे प्रकट होगी। अल्लाह (अ.ज) उस वास्तविकता की कसम खाता है, ‘जैसा कि आप अब सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ के दिल की आग में हैं, यह शक्ति के स्वामी की ओर एक यात्रा है।’ यह वह आग है जिसमें आप हैं अल्लाह (अ.ज) वर्णन कर रहे हैं, “आयातुल क़ुर-आन” (पवित्र क़ुरान, 27:1) – ये क़ुरान के संकेत हैं। अब जब आप क़ुरान के संकेत के अंदर हैं तो आप दिल के अंदर हैं। इसीलिए “या-सीन” का मतलब है प्यार और हबीब (प्रिय)। ‘या-सीन हबीबुल्लाह,’ अब आप ईश्वरीय प्रेम की ज्वाला में हैं।
प्रत्येक ज्ञान “या” के भीतर है
अल्लाह (अ.ज) ने इस वास्तविकता को ज्ञात होने के प्रेम से बनाया है। फ़रमाया, ‘हर उलूम इस ‘या‘ में है। अलिफ़ से या तक के हर इल्म से मैं तुम्हें तैयार करुंगा, नतीजन वह या बन जाएगा।’ क्योंकि अगर आप अलिफ़ से या तक जाते हो, तो जो बचता है वह या है जो अलिफ़ के अंतर्गत आता है और या बन जाता है। अत: सारा ज्ञान हृदय में डाल दिया जाता है। सीन वह उसकी अभिव्यक्त वास्तविकता बन जाता है, यह सीन और रहस्य जिसे अल्लाह (अ.ज) उस बन्दे के लिए खोलना शुरू करते हैं, वह इन सभी ज्ञानों को लेतें है और उन्हें उनके सभी इल्म उल यक़ीन – निश्चितता के सभी ज्ञान देना शुरू करते हैं।
ऐन उल यक़ीन ध्यान के माध्यम से ज्ञान का साक्षी होना है
अल्लाह (अ.ज) उन्हें प्रशिक्षण देना शुरू कर देगा कि कैसे निश्चितता की आँखें खोली जाएँ; वे अहलुल बसीराह (जिनके दिल खुले हैं) से बन जाते हैं। कि आपका रहस्य अदृश्य में है, न कि आपकी भौतिक आँखों के दृश्य में। आप कैसे ध्यान करते हैं, आप कैसे चिंतन करते हैं, आप अपना संबंध कैसे बनाते हैं, वे आपको जो ज्ञान देते हैं, आपके उस कनेक्शन द्वारा वे आपको मुराक़बा (आध्यात्मिक संबंध) और मुहासबा (आत्म-परीक्षा), मुहब्बत (प्रेम) और तफक्कुर (चिंतन) सिखाते हैं।
औलियाल्लाह (संत) वास्तविकता से बोलते हैं, सपनों और कल्पना से नहीं
यह सब यक़ीन का एक हक़ बनाएगा। ताकि आप एक ऐसे व्यक्ति हों जिसे सिखाया गया है। आपने इसे देखा और आपने सच्चाई को समझा और कोई भी आपको इसके अलावा कुछ नहीं बता सकता। आप अपने विश्वास में दृढ़ और यक़ीन (निश्चित) और ठोस हैं, न कि दर्शनशास्त्र से, न किसी की किताब से और न ही सपनों से। सपनों की दुनिया के बारे में बात मत करें, अब आधी दुनिया सपनों में क्या देखा यह सोचकर मानसिक और पागल हो जाएगी। यह टेलीविजन की दुनिया है, हम वास्तविकता की बात कर रहे हैं, जहां आप अपनी जागृत अवस्था में, अपने ध्यान और चिंतन में, वास्तविकताओं के साक्षी होते हैं।
कई पागल लोग अभी भी संपर्क कर रहे होंगे, ‘मैंने यह देखा, मैं यह हूँ, मैं वह हूँ।‘ नहीं, नहीं, नहीं, नहीं, नहीं! शैतान आपके सभी संकेतों के साथ खेल रहा है, अगर आप इसे वास्तविक समय में ध्यान करते हुए नहीं देख रहे हैं, इस चैनल और कनेक्शन के माध्यम से चिंतन कर रहे हैं जिसका वे वर्णन करते हैं तो वे इसके बारे में सुनने की परवाह नहीं करते हैं। यदि आप इन औलिया (संतों) से जुड़ने में सक्षम नहीं हैं, संचरण प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं, उनके ज्ञान को समझ नहीं पा रहे हैं, और वास्तविक समय को समझ से जोड़ना शुरू नहीं कर पा रहे हैं, तो वे उन सपनों का इंतजार नहीं कर रहे हैं जहां लोगों के पास कल्पनाएं हैं। वे यह हैं, उन्होंने यह देखा, उन्होंने यह प्रकट होते देखा, उन्होंने यह प्रकट देखा। यह पूरी तरह से कल्पना बन सकती है।
अल्लाह (अ.ज) “या-सीन” की हक़ीक़त की क़सम खाता है
तो फिर “या-सीन” की यह हक़ीक़त अल्लाह (अ.ज) “या-सीन” की क़सम खाता है। “या-सीन” क्या? “वल क़ुरआनिल हकीम।”
﴾يس ﴿١﴾ وَالْقُرْآنِ الْحَكِيمِ ﴿٢
36:1-2 – “Ya-Seen. (1) Wal Qur’anal Hakeem. (2)” (Surat YaSeen)
“या-सीन। (1) इस पुरअज़ हिकमतवाले क़ुरान की क़सम। (2)” (सूरत यासीन, 36:1-2)
आप क़ुरान से बढ़कर किस चीज़ की क़सम खा सकते हैं? अल्लाह (अ.ज) कह रहे हैं, ‘अब जब आप या-सीन में दाखिल हो गए हैं, मैं या-सीन, वल क़ुर’आनिल हकीम की कसम खाता हूँ,’ क्योंकि हमने सारे उलूम कहे हैं। तो, यह सब हिकमाह (बुद्धि) और ज्ञान, ‘मैं इसकी कसम खाता हूं कि सबसे पवित्र क्या है जिसे आप समझ भी सकते हैं।’ आप क्या समझ सकते हैं कि सृष्टि में सबसे पवित्र क्या है? अल्लाह (अ.ज) की अनिर्मित वाणी! अल्लाह (अ.ज) इन वास्तविकताओं पर क़ुरान की कसम खाता है, वह “या” और “सीन” की गवाही दे रहा है, वल क़ुर’आनिल हकीम और हर हिकमाह और ज्ञान जो पवित्र क़ुरान की वास्तविकता के बारे में आपके पास आने वाला है वह सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ के इस दिल की आग में है।
सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ के पदचिह्न सिरातल मुस्तक़ीम (सीधा रास्ता) हैं
अगला श्लोक क्या है?
श्रोता पढ़ते हैं: “इन्नका लमिनल मुरसलीन अला सिरातिम मुस्तक़ीम।”
﴾إِنَّكَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ ﴿٣﴾ عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ ﴿٤
36:3-4 – “Innaka laminal Mursaleen (3) Alaa Siraatim Mustaqeem.” (Surat YaSeen)
“कि आप, [ओ मुहम्मद], निश्चय ही रसूलों में से हो। एक सीधे मार्ग पर।” (सूरत यासीन, 36:3-4)
पैगंबर ﷺ का वर्णन करते हुए, कि वह एक सम्मानित दूत हैं और वह सीधे रास्ते पर हैं। वह सय्यिदिना सिरातल मुस्तक़ीम ﷺ हैं। यदि आपके पैर, इसीलिए हमने कहा है कि नजात और मोक्ष यह है कि यदि हमारे पैर किसी और के पैर पर नहीं हैं; इसका अनुसरण न करें और उसका अनुसरण न करें। लेकिन मेरे पैर सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ के पैरों और प्रेम और मुहब्बत पर होने चाहिए।
अगर मैं पैगंबर ﷺ का अनुसरण कर रहा हूं, तो क्या मेरे पास प्यार है? क्या मेरे पास करुणा है? क्या मेरे पास सभी अच्छे गुण हैं और मुझे लगता है कि सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ मेरे चरित्र से खुश हैं, मेरे ज्ञात और अज्ञात कार्यों से खुश हैं? लोगों को ज्ञात कार्य नहीं और स्वयं को लोगों के सामने अच्छा और स्वच्छ दिखाना लेकिन पीछे गंदे कार्य करना। लेकिन क्या पैगंबर ﷺ मुझसे खुश हैं? यदि ऐसा है, तो मेरे पैर सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ के चरणों पर हैं – सय्यिदिना सिरातल मुस्तक़ीम ﷺ।
तरिक़ाह (आध्यात्मिक पथ) आपके अंदर को वश में करके बाहर को नियंत्रित करता है
यह सब रहमान (सबसे दयालु) से नहीं बल्कि सिफत अर-रहीम (सबसे करुणामय का गुण) से आ रहा है, जो प्रकाश की दुनिया की आंतरिक वास्तविकता “तंज़िलुल ‘अज़ीज़ुर रहीम” से आ रहा है।
﴾تَنزِيلَ الْعَزِيزِ الرَّحِيمِ ﴿٥
36:5 – “Tanzilal ‘Azizir Raheem.” (Surat YaSeen)
“जो बड़े मेहरबान और ग़ालिब (खुदा) का नाज़िल किया हुआ है।” (सूरत यासीन, 36:5)
यह रूप की दुनिया से नहीं आ रहा है; यह इशारा (संकेत) और यह आदेश प्रकाश की दुनिया की आंतरिक वास्तविकता से आ रहा है। अल्लाह (अ.ज) कहता है, ‘जो आपकी शरीरिकता को भी आदेश देता है, यह आदेश प्रकाश की दुनिया से आ रहा है – आपकी आंतरिक आणविक वास्तविकता।‘ कि अल्लाह (अ.ज) आपकी आंतरिक वास्तविकता से आदेश भेजेगा, और आपके अंदर बदलाव आएगा और बाहर प्रकट होना शुरू हो जाएगा, यह कोई बाहरी बदलाव नहीं है।
इसीलिए तारीक़े को आपके बाहरी रूप को बदलने और एक निश्चित तरीके से चलने और बात करने की ज़रूरत नहीं है; उन्हें आपके अंदर के पकने की ज़रूरत है। क्यों? क्योंकि आयतल करीम, “तंज़ीलुल अज़ीज़ुर रहीम।” (पवित्र क़ुरआन, 36:5)। रहीम (सबसे दयालु), सिफ़ात अल से, “व सलामुन क़व्लम मीर रब्बिर रहीम।”
﴾سَلَامٌ قَوْلًا مِّن رَّبٍّ رَّحِيمٍ ﴿٥٨
36:58 – “Salamun qawlam mir Rabbir Raheem.” (Surat YaSeen)
“सलाम,” मेहरबान परवरदिगार की तरफ़ से पैग़ाम आएगा। (सूरत यासीन, 36:58)
सिफत अर-रहीम (सबसे दयालु का गुण) सिफत अर-रहमान (सबसे करुणामय का गुण) को नियंत्रित करता है – अंदर बाहर को नियंत्रित करता है। अगर अंदर अच्छा और शक्तिशाली है तो यह बाहर की हर चीज़ को ठीक कर देगा।
सोशल मीडिया का धोखा – हम दज्जाल के समय में रह रहे हैं
लेकिन हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जिसे ‘फेसबुक’ कहा जाता है। बाहर से सब कुछ अच्छा दिखता है, अंदर से शायद सड़ा हुआ हो क्योंकि आप देख नहीं सकते। उन्होंने इन सभी लोगों को इंस्टाग्राम पर पाया, वे सभी नकली थे। वे एक ऐसी कार के सामने जाते हैं जो उनकी नहीं है, वे एक ऐसे रेस्टोरेंट में खाते हैं जहाँ उन्होंने खाना भी नहीं खाया, शायद उन्होंने किसी और के पकवान की तस्वीर ली हो। एक मशहूर चीनी महिला थी, जो खाने की तस्वीरें पोस्ट करने के लिए मशहूर थी, और उनके पास उसकी एक जांच रिपोर्ट थी, वह दूसरे गूगल विज्ञापनों से खानों की फ़ोटोशॉप कर रही थी। वह कभी उस रेस्टोरेंट में गई ही नहीं। इसलिए हम अब पूर्ण धोखे के दज्जाल समय में रह रहे हैं।
इस “तंज़ीलुल अज़ीज़ुर रहीम” (पवित्र कुरान, 36:5) का अर्थ है कि जो आपके पास आ रहा है वह आपकी आत्मा के आंतरिक कार्यों से है। अगर अल्लाह (अ.ज) अपनी रिदा और संतुष्टि देता है और इसकी वास्तविकता पर मुहर लगाता है, तो इसका मतलब है कि आपके आंतरिक कार्य पूर्ण हो जाएंगे और आपका आंतरिक प्रकाश पूर्ण हो जाएगा, आपकी आंतरिक वास्तविकता पूर्ण हो जाएगी, आपका आंतरिक संबंध पूर्ण हो जाएगा। बाहरी नहीं, बाहरी की कोई ज़रूरत नहीं है। जो लोग केवल बाहरी चीजों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, हो सकता है कि उनके अंदर का हिस्सा सड़ गया हो और हो सकता है कि वे इसके द्वारा बहुत से लोगों को आकर्षित करते हों, और यही आध्यात्मिकता का फेसबुक बन जाता है। लेकिन इस तरीक़े में, नहीं! इस तरीक़े में इसलिए वे आपको शेखों के साथ अपना संबंध बनाना सिखा रहे हैं; [email protected].
यदि आपका अनुभव सही कनेक्शन से नहीं है, तो यह गलत है!
सीखें कि अपना ध्यान कैसे करें; यह शक्ति का एकमात्र स्रोत है जिसे वे स्वीकार कर रहे हैं। यदि आप कहते हैं, ओह आपको चुना गया है, मेरे पास अब एक ईमेल आ रहा है जिसमें कहा गया है कि उसे चुना गया है, वह यह देखता है, वह वह देखता है – यह सब बकवास है, सब बकवास है! किसी को भी किसी भी चीज़ के लिए नहीं चुना गया है, केवल चुने गए व्यक्ति सय्यिदिना महदी (अ.स) हैं। यदि आपको लगता है कि आपके पास अनुभव हैं, तो लाइन में खड़े हो जाएँ; हर किसी के पास अनुभव हैं। लेकिन क्या आप सही तरीके से कनेक्ट हो रहे हैं? बस उन्हें इसी में दिलचस्पी है। क्योंकि दज्जाल (धोखेबाज़ आदमी) को भी अनुभव हो रहे हैं और वह अपने सभी लोगों को अनुभव प्राप्त करने के लिए भेज रहा है। मुझे यकीन है कि व्हाइट हाउस के लोगों को भी अनुभव हो रहे हैं लेकिन यह वह अनुभव नहीं है जिसमें हमारी रुचि है। अनुभव क्या है? आप अपने दिल को जोड़ते हैं। आप कहते हैं, ‘अना अब्दुलकल ‘आजीज़, व दाईफ़, व मिस्कीन, मैं एक ज़ालिम हूँ और मैं एक अत्याचारी हूँ। मैं खुद को नहीं जानता, मैं अपने भगवान को कैसे जान सकता हूँ?
قَال رَسُولَ اللَّهِ ﷺ:” مَنْ عَرَفَ نَفْسَهْ فَقَدْ عَرَفَ رَبَّهُ”
Qala Rasulullahi ﷺ: “Man ‘arafa nafsahu faqad ‘arafa Rabbahu”
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा: “जो खुद को जानता है, वह अपने रब को जानता है।”
जैसे ही आप हमें बताते हैं कि आपको लगता है कि आप कुछ जानते हैं, तो ‘मुझे अपने सात नाम बताएं?’ आप अपने आप को नहीं जानते और आप अल्लाह (अ.ज) को जानने का दावा करना चाहते हैं?’ नहीं! तो रास्ता क्या है? मुझे अपने आप को जानना है। मैं जानता हूँ कि मेरा पहला स्व निश्चित रूप से एक उत्पीड़क है और मैं खुद को कुछ भी नहीं होने, कुछ भी नहीं होने, कुछ भी नहीं होने के लिए कुचलने पर काम करने जा रहा हूँ, फिर मैं ध्यान और चिंतन करने का रास्ता अपनाता हूँ।
एक शेख़ पर ध्यान केंद्रित रखें और अपना कनेक्शन स्थापित करें!
जब मैं ध्यान और चिंतन करता हूँ तो मुझे उस शेख पर ध्यान केंद्रित करना होता है जो मुझे सिखा रहा है। मैं दस अलग-अलग शेखों को संदेश भेजना चाहता हूँ और दस अलग-अलग शेखों की किताबें पढ़ना चाहता हूँ और यह पढ़ना और वह पढ़ना चाहता हूँ और आपसे उनके बारे में पूछना चाहता हूँ और उनसे आपके बारे में पूछना चाहता हूँ और…आप खो गए हैं! आप हर जगह हैं। जो अब आपसे बात कर रहा है, बेहतर होगा कि आप उसके साथ अच्छे संबंध रखें। यदि नहीं, तो किसी और के चैनल से जुड़ें और उनके साथ अपना संबंध बनाएँ। आप दस अलग-अलग प्रोफेसरों को कैसे पढ़ सकते हैं और फिर एक अलग प्रोफेसर द्वारा परीक्षण किए जाने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?
आपने स्कूल में ऐसा नहीं किया, आपने अपने जीवन में कभी भी ऐसा नहीं किया। सुनिश्चित करें कि आपका कनेक्शन स्पष्ट है, ‘मैं आपकी बातें सुन रहा हूँ मैं आपसे संवाद कर रहा हूँ। मैं यह सीखने की कोशिश कर रहा हूं कि अपना कनेक्शन कैसे बनाया जाए।‘ यह सब साफ है, यह सब एकता है! जब आप इधर-उधर उछलना शुरू करते हैं तो कोई नहीं जानता कि आपके समन्वय क्या हैं। आप किसी दूसरे शेख के पास
जाकर हमारे बारे में कैसे पूछ सकते हैं? आप हमारे पास आकर किसी अन्य शेख के बारे में कैसे पूछ सकते हैं? मुझे क्या पता वह क्या कर रहा है, क्या आप जुड़ रहे हैं, आप क्या कर रहे हैं, मुझे नहीं पता आप क्या कर रहे हैं।
तो इसका मतलब है कि आप बातचीत करने के तरीके पर ‘दृढ़‘ हैं। अपना कनेक्शन बनाएं! आप कनेक्शन बनाते हैं और फ़ैज़ (आशीर्वाद की वर्षा) का निर्माण करना शुरू करते हैं जो आपके दिल में आता है और वह दिल एक रोशनी और एक ऊर्जा महसूस करना शुरू कर देता है। अपना समर्थन दें; उसका समर्थन करें जिस पर आप विश्वास करते हैं। आप के पास अब ऐसा कुछ भी नहीं है जो आपको आने वाले चीजों से बचा सकता है, सिवाय आपका कनेक्शन, आपके रिश्ते, आपकी प्रतिबद्धता के।
शेख़ ने अपने मार्ग के लिए सबकुछ दे दिया
हमने पहले कहा, आप एक वकील के पास जाते हैं, आप एक डॉक्टर के पास जाते हैं, आप सब कुछ करते हैं, आप हर फीस देते हैं। आप एक शेख़ के पास आते हैं और आप कहते हैं, ‘यह मुफ़्त है।’ नहीं, यह मुफ़्त नहीं है! शेख़ के पास जो कुछ है वह उन्हें नहीं मिला मुफ़्त होने से। उन्होंने अपना जीवन, अपना खून, अपना पसीना और अपने आँसू अपने मार्ग के लिए दिए। उन्होंने उस मार्ग को प्राप्त करने के लिए सब कुछ दिया। उन्होंने खुद को अल्लाह (अ.ज) के मार्ग में फ़किर (गरीब) बना लिया। अब, अगर अल्लाह (अ.ज) ने उन्हें समृद्ध किया तो इसलिए कि अल्लाह (अ.ज) ने उन्हें साफ किया, उनकी गंदगी को दूर किया और उन्हें सारी स्वर्गीय नेमतें दीं। कोई नक्शबंदी औलिया गरीबी में नहीं है – यह तरीक़ा ऐसा नहीं है, यह सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ का साम्राज्य है! न ही उनका कोई छात्र उस प्रकार की कठिनाई में है।
जब आप प्रेम करते हैं, तो आप सक्रिय रूप से उस वास्तविकता के प्रति देते हैं
लेकिन यह रास्ता सक्रिय जीवन जीने पर आधारित है। आप यह नहीं कह सकते कि आप किसी चीज़ से प्यार करते हैं जब आप उसके लिए कुछ नहीं देते, आप उसका समर्थन नहीं करते, आप उसके लिए त्याग नहीं करना चाहते। हमारा जीवन अपने प्यार को वास्तविक बनाना है, हम वास्तविक लोग हैं। जब हम कहते हैं, ‘हम सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ से प्यार करते हैं,’ तब आप इसे देखते हैं। क्या आपने किसी को हमसे अधिक मौलीद मनाते देखा है? क्या हम ऐसे लोग हैं जो केवल कहते हैं, ‘हाँ हम मौलीद ए नबी ﷺ (पैगंबर ﷺ के जन्मदिन का जश्न) से प्यार करते हैं।’ सप्ताह में तीन दिन हम मौलीद ए नबी ﷺ मनाते हैं! हमें वास्तविक होना होगा और यह पूरी बात का एक हिस्सा है।
आध्यात्मिक बुनियाद बनाना सीखें
तो ये सब कदम दर कदम है, कदम दर कदम। इसलिए जब भी आप हमें ईमेल करेंगे, आपको उचित जवाब मिलेगा। एक – यही रास्ता है, यही बुनियाद है, यही तारीक़ा है, ये प्रारंभिक शिक्षाएं हैं। इन शिक्षाओं के साथ खुद को दृढ़ बनाइए ताकि ये वास्तविकताएँ जिनका वे वर्णन करते हैं जिनसे छात्रों को सजाया जा रहा है। अब आप कहते हैं, ‘मैं इस ऊर्जा को महसूस नहीं कर सकता जिसके बारे में आप बात कर रहे हैं।’ अपना संबंध बनाएँ! ये सभी ज्ञान हमें इस यात्रा पर ले जा रहे हैं, चाहे आप इसे महसूस करें या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। तथ्य यह है कि शेख़ जो वर्णन कर रहे हैं वह एक ख़ुशख़बरी है क्योंकि आप उनकी यात्रा बस में हैं। वह जहाँ भी जा रहे हैं, जो कुछ भी देख रहे हैं, अल्लाह (अ.ज) उन्हें जिससे भी सुशोभित कर रहा है, वे छात्रों को समझने के लिए वही सजा रहे हैं।
प्रेम से भाग लें और अपार आशीर्वाद प्राप्त करें!
य
ह टूर बस सिर्फ़ एक कोठरी में नहीं जा रही है – आप एक कोठरी में हो सकते हैं, वे नहीं हैं! आप जानते हैं कि इनमें से कुछ लोग सोचते हैं कि कुछ भी नहीं हो रहा है – आपके लिए कुछ भी नहीं हो रहा है लेकिन शेखों के लिए नहीं। वे जो ज्ञान बोल रहे हैं, जो वास्तविकता वे बोल रहे हैं वह सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ के दिल की गहराई से है। ये सारे फ़ैज़ और ये सारी हकीकतें उनकी रूह को सजाती हैं और खुशखबरी देती हैं कि, ‘इसमें शामिल हो जाओ।’ इन निमतों और इन आशीर्वादों में हिस्सा लो और देखें कि क्या यह कुछ ही समय में आपके जीवन को पूरी तरह से बदल नहीं देता है! इसमें अपनी थोड़ी सी मेहनत और प्यार लगाओ ताकि आप इसके फ़ैज़, इसकी नेमतें और इसके फ़ायदे पा सकें, इंशाअल्लाह।
हम प्रार्थना करते हैं कि अल्लाह (अ.ज) हमें सय्यिदिना मुहम्मद ﷺ के प्यार से नवाज़ें और हमें उस पवित्र उपस्थिति की ओर दौड़ने के लिए प्रेरित करें ताकि हम क्षमा मांग सकें हर प्रकार की कठिनाई से और हम, हमारा परिवार और हमारे समुदाय आने वाली हर कठिनाई से सुरक्षित रहें।
Subhana rabbika rabbal ‘izzati ‘amma yasifoon, wa salaamun ‘alal mursaleen, walhamdulillahi rabbil ‘aalameen. Bi hurmati Muhammad al-Mustafa wa bi siri Surat al-Fatiha.
सुहबा की मूल तारीख: दिसंबर १७, २०२०
इस सोहबाह का प्रतिलेखन करने में उनकी मदद के लिए हमारे प्रतिलेखकों के लिए विशेष धन्यवाद।
सम्बंधित आलेख:
- Heart of Qur’an – YaSeen, the Divinely Heart is the Source of All Power
- Realities of Surah YaSeen (Chapter 36) – Divine Secrets of Ya & Seen and 3 Oceans of Yaqeen
- Entering the Divine Fire – Secrets of Surah An-Naml
- Secret Combination of Words to Unlock Your Soul
- Meditate Now For Connection – World is Changing Fast
कृपया दान करें और इन स्वर्गीय ज्ञान को फैलाने में हमारा समर्थन करें।
कॉपीराइट © 2025 नक्शबंदी, इस्लामिक केंद्र वैंकूवर, सर्वाधिकार सुरक्षित।










